Friday, 10 August 2018

'मुझे प्यार है!' मेरे हमदम के साथ वो हसीन रात का अगला भाग


मैं मन ही मन मुस्काई, कसूर भी तो मेरा था| आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह मैने पानी को बाहर निकाला| 
"कम्बख़त नीद पहले ही खुल जाती तो क्या गुनाह कर देती| पूरा कपड़ा गीला हो गया|" 
मैने नीद तो जमकर लताड़ा| खिड़की के बाहर अभी भी हल्की सी बारिश हो रही थी और वो लगातार अंदर आने के लिए दस्तक दे रहा था| मैने घड़ी पर एक नज़र दौड़ाई, रात के 2 बज रहे थे| नीद तो कब की उड़ चुकी थी और अब थोड़ी ठंड भी बढ़ गयी थी मैने आलस मे आकर गीले कपड़े उतारकर सिर्फ़ टीशर्ट और हाफ पैंट जो पहनी थी| मैने ठंड और रात दोनो से पीछा छुड़ाने के लिए कॉफी को याद किया| 

वापस कंबल से खुद को ढका और जैसे ही कॉफी का एक सिप लिया, खुशी और ताज़गी का एहसास हुआ| पिछले 8 सालों मे कॉफी से मेरा प्यार और गहरा हुआ है| कॉफी और किताब के सिवा कौन अपना है? 8 साल से बस अपनी दुनिया|

मम्मी पापा, बहन 8 साल पहले एक रोड एक्सिडेंट मे दूर चले गये और फिर 1 साल अंदर दादा दादी| कुछ महीनो तक अंकल आंटी ने सम्हाला और जब मैं सदमे से बाहर आई तो खुद अलग रहने का फ़ैसला किया| सबने समझाया लेकिन मेरी ज़िद थी, खुद को बनाने की, पहचानने की और सच को स्वीकारने की|


कॉफी की एक एक सिप का मज़ा मैं आँखे बंद करके ले रही थी| अभी भी हवाओ का झोका अपने चेहरे पर महसूस कर रही थी| जैसे कोई साँसे चल रही हो| धीरे धीरे ये और भी गहरी होती जा रही थी| घबराहट मे मैं थोड़ा पीछे हुई, और अगले ही पल मेरी टी शर्ट पर गीलापन महसूस हुआ और 


Monday, 18 September 2017

'मुझे प्यार है!' मेरे हमदम के साथ वो हसीन रात का अगला भाग


मैं मन ही मन मुस्काई, कसूर भी तो मेरा था| आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह मैने पानी को बाहर निकाला| 
"कम्बख़त नीद पहले ही खुल जाती तो क्या गुनाह कर देती| पूरा कपड़ा गीला हो गया|" 

मैने नीद तो जमकर लताड़ा| खिड़की के बाहर अभी भी हल्की सी बारिश हो रही थी और वो लगातार अंदर आने के लिए दस्तक दे रहा था| मैने घड़ी पर एक नज़र दौड़ाई, रात के 2 बज रहे थे| नीद तो कब की उड़ चुकी थी और अब थोड़ी ठंड भी बढ़ गयी थी मैने आलस मे आकर गीले कपड़े उतारकर सिर्फ़ टीशर्ट और हाफ पैंट जो पहनी थी| मैने ठंड और रात दोनो से पीछा छुड़ाने के लिए कॉफी को याद किया| 

वापस कंबल से खुद को ढका और जैसे ही कॉफी का एक सिप लिया, खुशी और ताज़गी का एहसास हुआ| पिछले 8 सालों मे कॉफी से मेरा प्यार और गहरा हुआ है| कॉफी और किताब के सिवा कौन अपना है? 8 साल से बस अपनी दुनिया|

मम्मी पापा, बहन 8 साल पहले एक रोड एक्सिडेंट मे दूर चले गये और फिर 1 साल अंदर दादा दादी| कुछ महीनो तक अंकल आंटी ने सम्हाला और जब मैं सदमे से बाहर आई तो खुद अलग रहने का फ़ैसला किया| सबने समझाया लेकिन मेरी ज़िद थी, खुद को बनाने की, पहचानने की और सच को स्वीकारने की|

कॉफी की एक एक सिप का मज़ा मैं आँखे बंद करके ले रही थी| अभी भी हवाओ का झोका अपने चेहरे पर महसूस कर रही थी| जैसे कोई साँसे चल रही हो| धीरे धीरे ये और भी गहरी होती जा रही थी| घबराहट मे मैं थोड़ा पीछे हुई, और अगले ही पल मेरी टी शर्ट पर गीलापन महसूस हुआ और 

Sunday, 3 September 2017

September 03, 2017

मेरे हमदम के साथ वो हसीन रात




'ये शाम फिर ना आयेगी...' मेरा पसंदीदा गाना, मेरे पसंदीदा रेडियो चैनल पर चल रहा था और मैं  अपनी दुनिया मे अपने साथी के साथ खोई हुई थी| मैं अपने साथी के साथ सब कुछ भूल जाती हूँ, पलकें झपकाना भी|अनानास ही मुस्कुराना, कुछ पल के लिए उसके साथ ही उदास हो जाना, और फिर कभी हॅसना| एक अनोखा बंधन है, उसकी खुशी मे अपनी मुस्कुराहट पा लेती हूँ और गम के साथ थोड़ा रो लेती हूँ| 
पन्नो मे छुपी होती है मेरी खुशियाँ, ग़म और हमसफर 'किताबें'|

     जी हाँ किताबें जिन्हे बे-इंतेहा मोहब्बत करती हूँ| या यूँ कहिए की मेरा सच्चा प्यार तो किताबों से ही है| शायद इसलिए आज तक किसी और को दिल मे जगह नही दे पाई और ना ही ज़िंदगी मे|
आज मैं आपसे अपने सच्चे प्यार के साथ वो हसीन रात के एहसास साझा करने जा रही हूँ| उम्मीद है आपको पसंद आएगी|


"मेरे हमदम के साथ वो हसीन रात"

अक्तूबर का समय था, आमतौर पर मसूरी हमेशा ठंडा ही रहता है लेकिन उस दिन कुछ अजीब सा था हवाओ में| खाना खाकर, करीब 11 बजे आम दिनो की तरह बिस्तर के सिरहाने रखे टेबल लैंप को ऑन किया और जेम्स बॉन्ड पर लिखी एक किताब पढ़ रही थी| उन दिनो मुझे मशहूर लोगो के बारे मे जानने का शौक चढ़ा था|


हवाओं का काफिला और कॉफी का साथ किसी तरह से मुझे किताब मे बाँधे हुए थे| मैं बहुत बोर रही थी|  करीब आधे घंटे बाद मैने हवाओं को अपने बाल सहलाते हुए महसूस किया| अब मेरी आँखे बोझिल होती जा रही थी| अपने अपनी आँखे बंद कर ली| हवाओ ने मेरे कानों मे कुछ कहा, शायद पूछा, 'क्या तुम मेरा इंतज़ार कर रही थी?' एक पल को मैं चौंक गयी और अगले ही पल मेरी आँखों के सामने भयावह दृश्य था| मेरी किताब के दो दिन पन्ने फट चुके थे, बारिश बिना पूछे घर के अंदर दस्तक दे रही थी और तेज़ी से अपना रास्ता तलाश रही थी| मैं गुस्से मे उठी, खिड़की को बंद किया और पानी को रोकने का प्रयास करने लगी |आज पहली बार मुझे पानी से इतनी चिढ़ हुई थी उसने मेरे प्यार का जो हाल किया था उसके लिए मैं उसे ज़िंदगी भर माफ़ नही करती तभी मुझे याद आया सारी ग़लती तो उसकी है|



कहानी 'मेरी डायरी से' जारी है...
आपकी राय का इंतज़ार रहेगा|

Wednesday, 30 August 2017

August 30, 2017

Welcome Note!

Firstly, I would like to thank you for visiting The Anonymous Musing, where truth is not a trap!

I am Kyra! Does the name matter? If you are saying 'Yes', then please ask each girl beside you what I am going to share here. Most probably she will be uncomfortable answering you. If your answer is 'No' then you are truly going to explore more about yourself, your girlfriend, your sister, your friend and every girl you see.




Not only I will share my tough experience but true incidents with my friends, colleague, relatives in so called Decent society. Basically stories, poems and experience will be featured here. Stories will be based of true incidents, that may contain harsh words as well.